Tuesday, October 3, 2017

अनुवांशिक रोग

वर्णांधता - इसमें रोगी को लाल एवं हरा रंग पहचानने की क्षमता नहीं होती है ।
इस रोग में मुख्य रूप से पुरुष प्रभावित होता है ।

स्त्रियों में यह तभी होता है जब उसके दोनों गुणसूत्र (xx)  प्रभावित हो ।
इस रोग की वाहक स्त्रियां होती हैं ।

(2) हीमोफीलिया - इस रोग में व्यक्ति को चोट लगने पर आधा घंटे से 24 घंटे तक रक्त का थक्का नहीं बनता है ।
यह मुख्यता पुरुषों में होता है ।
स्त्रियों में यह रोग तभी होता है जब उनके दोनों गुणसूत्र प्रभावित हो। इस रोग की वाहक स्त्रियां है । हेंलडन का मानना है कि यह रोग ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया से प्रारंभ हुआ।

(3)  टर्नर सिंड्रोम-  यह रोग स्त्रियों में होता है इस रोग से ग्रसित स्त्रियों में गुणसूत्रों की संख्या 45 होती है इसमें शरीर अल्पविकसित कद छोटा तथा वक्ष चपटा होता है । जननांग प्राय: अविकसित होता है जिससे वह बाँझ होती हैं।

(4)  क्लीनेफेल्टर सिंड्रोम - यह रोग पुरुषों में होता है इस रोग से ग्रसित पुरुषों में गुणसूत्रों की संख्या 47 होती है ।
इसमें पुरुषों का वृषण अल्प विकसित एवं स्तन स्त्रियों के समान विकसित हो जाता है । इस रोग से ग्रसित पुरुष नपुंसक होता है ।

(5) डाउन सिंड्रोम - इस रोग से ग्रसित रोगी मंदबुद्धि आंखें टेढी , जीभ मोटी तथा अनियमित शारीरिक ढांचा होता है । इसे मंगोलिज्म कहते हैं ।

(6) पटाऊ सिंड्रोम - इसमें रोगी का ऊपर का होंठ बीच से कटा होता है तथा तालू में दरार होती है इस रोग से ग्रसित मंदबुद्धि नेत्रदान से प्रभावित हो सकते हैं।

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